Friday, December 19, 2008

wrath 13

हम न समझे थे बात इतनी सी,
ख्वाब शीशे थे दुनिया पत्थर की।
आज, एक नए मोड़ पर खड़े होकर,
मुझे जो एहसास हुआ वोह अपरिणित था।
हिन्दी के शुद्ध प्रयोग हेतु, हमे प्रतिक्षण श्रम करते रहना होगा।
मेरी दुनिया है तुझमे बसी,
तेरे बिन मैं क्या कुछ भी नही,
मेरी जान है मेरी जान है,
oo साथी मेरे।
मैं समय हूँ.

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